भारत एके समान बनाओल एकटा जन नहि छी। ई त अनेक लोक छथि जे एकहि देश केँ मिलिकय बाँटैत छथि - आ ई भिन्नता कोनो सुधारबाक खोट नहि, यएह त पूरा विचार छी।
संविधान हर नागरिक सँ ई अपेक्षा करैत अछि:
“to promote harmony and the spirit of common brotherhood amongst all the people of India transcending religious, linguistic and regional or sectional diversities.”
मन्दिरक घण्टी, अजानक स्वर, गिरजाघरक भजनमण्डली, गुरुद्वाराक लंगर - अकसर एकहि गली मे, अकसर एकहि सप्ताह मे। लगेमे केओ ने केओ सदिखन किछु ने किछु मनबैत रहैत अछि।
हर किछु सय किलोमीटर पर एकटा नव रसोई
वएह एकटा अन्न सय तरहक अलग-अलग भोजन बनि जाइत अछि। हरेक क्षेत्र अहाँकेँ अपन ढंग सँ खुआबैत अछि - आ हरेक क्षेत्रकेँ चुपचाप ई विश्वास रहैत छैक जे ओकरे ढंग सभसँ नीक अछि।
आ ई रहल ओ हिस्सा जे अहाँक अछि
यएह ओ अछि जकर रक्षा छोट-छोट बात करैत अछि
संविधान हर नागरिक सँ ई अपेक्षा करैत अछि:
“to value and preserve the rich heritage of our composite culture.”