बराबरी, अधिकारसँ। एहसानसँ नै।
हर लिंगक लोककेँ एकहि बेर, एकहि आवाज, आ मेजपर एकहि कुर्सी दिअ। बराबरी केकरो देल एहसान नै अछि - संविधान पहिनहिसँ एकरा अधिकार कहैत अछि।
ई रहल विज्ञान
- की होइत अछिकेकरो हुनक लिंगक कारणे नीच मानब
- कोनाभारतक संविधान (Constitution of India) राज्यकेँ केवल लिंगक आधारपर, आन आधार सभक संग, कोनो नागरिकक संग भेदभाव करबासँ रोकैत अछि
- तेँलिंगक बिना विचारल बराबरीक बरताव एक संवैधानिक गारंटी अछि, केओ देत वा रोकत एहन एहसान नै
सरकारी गिनती - सरकारी अभिलेखIN
“The State shall not discriminate against any citizen on grounds only of religion, race, caste, sex, place of birth or any of them.”
ई अनुच्छेद 15 (Article 15), खंड (1) केर शब्दशः पाठ अछि; ई राज्यकेँ बाध्य करैत अछि आ संवैधानिक अधिकारक बात कहैत अछि, कोनो मापल गेल परिणामक नै।
स्रोत: Constitution of India, Article 15 - Constitution of India (text hosted by constitutionofindia.net / Centre for Law & Policy Research)(जाँचल 2026-07-18)
आ जखन हम ई करैत छी
जखन कोनो कोठली, कार्यस्थल वा घर हर लिंगकेँ बराबर मानैत अछि, तखन ओ केवल आधाक बदला सभक प्रतिभाक उपयोग करैत अछि।
अहाँ नहि जनैत छलहुँ। आब जनैत छी।