एम्बुलेंस देखलहुँ? जगह बनाउ।
जखन अहाँक पाछाँ एम्बुलेंस हो, बामा दिस भऽ जाउ आ ओकरा जाय दिअ। जामसँ बचय लेल ओकर पाछाँ-पाछाँ नहि सटू।
ई रहल विज्ञान
- की होइत अछिएहन यातायात जे आपातकालीन गाड़ीके तुरंत रस्ता दैत अछि
- कोनाहृदय गति रुकब आ गंभीर चोट जेहन आपात स्थितिमे, इलाज शुरू हएबाक पहिने हर मिनट संग बचबाक सम्भावना घटैत जाइत अछि
- तेँजल्दी रस्ता भेटला सँ बेसी लोक ओहि समयक भीतर अस्पताल पहुँचैत अछि जहिया इलाज अखनो काज करैत अछि
ई कोना काज करैत अछि - एकर आकार एतय नहि मापल गेलGLOBALविदेशमे मापल गेल - तरीका देखेबाक लेल, भारतक अंक लेल नहि
“Survival from time-critical emergencies such as cardiac arrest declines rapidly with each minute of delay to treatment.”
हम तरीका देखबैत छी, भारतक बचाव-प्रतिशत नहि - रस्ता देबाक एकटा काजके कोनो साफ राष्ट्रीय अंक नहि देल जा सकैत अछि।
स्रोत: Emergency and trauma care - time-critical conditions - World Health Organization(जाँचल 2026-07-18)
आ जखन हम ई करैत छी
खाली जगह ओ किछु मिनट भऽ सकैत अछि जे तय करैत अछि जे कियो समयमे इलाज धरि पहुँचत कि नहि।
अहाँ नहि जनैत छलहुँ। आब जनैत छी।