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नागरिक बोध दोसरक बात नहि थिक। ई हम सभक बात थिक।

समस्या सधैं दोसर लोक होइत छथि. अहाँ सेहो दोसर लोक छी.

ककरो लजबय लेल नहि - एहि पन्नापरक कम-सँ-कम तीन काज त हम सभ केओ कयने छी. ई त बस चुपचाप देखबैत अछि जे छोट-छीन बात कतय-कतय तक पहुँचैत अछि: हॉर्न, रैपर, थूक, धक्का. साँच विज्ञान लेल एक टैप. फेर अहाँ तय करू.

सभक लेल। कोनो खाता नहि, कोनो लॉगिन नहि, अहाँक बारेमे किछु नहि जमा कएल जाइत अछि।

  1. 1.रोज-दिनक बात देखू
  2. 2.साँच विज्ञान लेल टैप करू
  3. 3.आब अहाँ जानि गेलहुँ - कोनो भाषण नहि

कोनो ठाम सँ शुरू करू

9 ठाम · 41 रोज-दिनक बात, हर एकक हवाला देल अछि

रैपर हल्का होइत अछि। बाढ़ि नहि।

अपन रैपरके सड़क पर वा नालीमे फेकबाक बदला कूड़ादानी धरि लऽ जाउ।

ई रहल विज्ञान
  1. की होइत अछिसड़क आ खुजल नालीमे फेकल कचरा आ प्लास्टिक
  2. कोनाकचरा बरखाक नालीके बन्द कऽ दैत अछि तेँ पानि जमा भऽ जाइत अछि; फेकल डिब्बा ओहि पानिके रोकैत अछि, जतय Aedes मच्छर पनपैत अछि
  3. तेँजाहि वार्डमे नालीक सफाई कम होइत अछि, ओतय बेसी पानि जमा होइत अछि आ मच्छर सँ फैलय वला बेमारी बेसी देखल जाइत अछि
संकेत करैत - असल दुनियाँमे मापल गेलIN-WB
Discarded household waste and water-holding containers were documented as principal larval habitats for dengue vectors in urban India.

एक अवलोकनजन्य सम्बन्ध: कचरा फेकब प्रायः आन सफाईक कमीक संगहिं होइत अछि, तेँ ई सम्बन्ध देखबैत अछि, कोनो साफ कारण-आ-परिणामक अंक नहि।

स्रोत: Household wastes as larval habitats of dengue vectors (Kolkata) - Peer-reviewed study (PMC / NCBI)(जाँचल 2026-07-18)

आ जखन हम ई करैत छी

जे रैपर कूड़ादानी धरि पहुँचैत अछि, से नालीके साफ राखैत अछि, तेँ बरखा एला पर पानि जतय जेबाक चाही ओतय जाइत अछि।

अहाँ नहि जनैत छलहुँ। आब जनैत छी।

हॉर्न कोनो लिफ्टक बटन नहि थिक।

हॉर्न केवल केकरो खतरा सँ सचेत करय लेल बजाउ। जाममे, लाल बत्ती पर, वा अस्पतालक लग एकरा दबेला सँ यातायात नहि सरकैत अछि।

ई रहल विज्ञान
  1. की होइत अछियातायातमे लगातार, बिनु जरूरतक हॉर्न बजायब
  2. कोनाWHO द्वारा सुझाओल स्तर सँ बेसी लगातार सड़क-यातायातक शोर शरीरके हल्का तनावक स्थितिमे राखैत अछि आ नीन तोड़ैत अछि
  3. तेँसमयक संग, बेसी तनाव, खराब नीन, बढ़ल रक्तचाप आ कानक क्षति सँ जुड़ल अछि
सभसँ मजबूत - बहुत अध्ययन सहमतEUविदेशमे मापल गेल - तरीका देखेबाक लेल, भारतक अंक लेल नहि
WHO recommends keeping road-traffic noise below 53 dB Lden (day) and 45 dB Lnight to protect health.

ई सीमा WHO क यूरोपीय सलाह थिक, तरीका देखेबाक लेल देल गेल। भारतक अपन CPCB सीमा (आवासीय क्षेत्रमे 55 dB day / 45 dB night) एतुका नियम थिक।

स्रोत: Environmental Noise Guidelines for the European Region - World Health Organization (Europe)(जाँचल 2026-07-18)

आ जखन हम ई करैत छी

जाहि गलीमे हॉर्नक मतलब केवल 'खतरा' हो आ आन किछु नहि, ओ बेसी शांत, बेसी सुरक्षित आ ओकर लग सूतब बेसी आसान होइत अछि।

अहाँ नहि जनैत छलहुँ। आब जनैत छी।

हेलमेट पहिरू। हर बेर।

जखनो अहाँ दुपहिया चलाबी वा ओकरा पर बैसी, हेलमेट पहिरू - बजार धरिक दू मिनटक बाट लेल सेहो।

ई रहल विज्ञान
  1. की होइत अछिबिनु हेलमेटक दुपहिया चलायब
  2. कोनादुर्घटनामे बिनु बचाव वला माथा पर पूरा चोट लगैत अछि; हेलमेट ओहि ऊर्जाके खोपड़ी धरि पहुँचबाक पहिने फैलाकऽ सोखि लैत अछि
  3. तेँजानलेवा वा जिनगी बदलि देनिहार माथाक चोटक आशंका बहुत बेसी
50,029people killed without a helmet (India, 2022)
सरकारी गिनती - सरकारी अभिलेखIN
50,029 persons died while not wearing a helmet in 2022; two-wheelers accounted for 44.5% of all road-accident deaths.

स्रोत: Road Accidents in India 2022 - Ministry of Road Transport & Highways (MoRTH)(जाँचल 2026-07-18)

आ जखन हम ई करैत छी

पट्टी बान्हि पहिरल हेलमेट, जे दुर्घटना जानलेवा भऽ सकैत छल, ओकरा बहुतोमे एहन बना दैत अछि जाहि सँ अहाँ चलिकऽ निकलि जाइत छी।

अहाँ नहि जनैत छलहुँ। आब जनैत छी।

भारत केँ जानू

छोट-छोट बात सँ पहिने, पैघ तस्वीर

ई धरोहर, सैकड़ों भाषा, जंगली ठाम, रोजमर्राक अजगुत - ओ भारतक एक झलक जकरा लेल अहाँक नागरिक बोध अछि।

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